धर्मलक्षणम्

धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौच मिन्द्रियनिग्रहः ।

धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम् ॥

धारणशक्ती , क्षमाशीलता , वासनांवर नियंत्रण , चोरी न करणे , अंतर्बाह्य शुचिता , इंद्रियांवर विजय , बुद्धीमत्तेचा वापर , ज्ञान मिळविण्याची तृष्णा , सत्याचे पालन आणि क्रोध न करणे , ही धर्माची दहा लक्षणे आहेत .

धारणशक्ति , क्षमाशील होना , अपनी वासनाओं पर नियन्त्रण रखना , चोरी न करना , अन्तरङ्ग और बाह्य शुचिता , इन्द्रियों को वश मे रखना , बुद्धिमत्ता का प्रयोग , अधिक से अधिक ज्ञान की पिपासा , मन वचन कर्म से सत्य का पालन और क्रोध न करना ; ये दस धर्म के लक्षण हैं।)

Fortitude , forgiveness , self control , non-stealing , purity , restrained senses , intelligence , learning , truth , and non-anger : these ten qualities constitute the characteristics of ‘dharma’.

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