Month: November 2016

Bhagavadgita 8-17, श्रीमद्भगवद्गीता ८-१७

श्लोकः सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद् ब्रह्मणो विदुः। रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः।।८-१७।। सन्धि विग्रहः सहस्र-युग-पर्यन्तम् अहः यत् ब्रह्मणः विदुः। रात्रिम् युग-सहस्र-अन्ताम् ते अहोरात्र-विदः जनाः।।८-१७।। श्लोकार्थः यत्...

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Bhagavadgita 8-16, श्रीमद्भगवद्गीता ८-१६

श्लोकः आब्रह्मभूवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन। मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते।।८-१६।। सन्धि विग्रहः आब्रह्म-भूवनात् लोकाः पुनः-आवर्तिनः अर्जुन। माम् उपेत्य तु कौन्तेय पुनः-जन्म न विद्यते।।८-१६।। श्लोकार्थः हे अर्जुन!...

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Bhagavadgita 8-15, श्रीमद्भगवद्गीता ८-१५

श्लोकः मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्। नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः।।८-१५।। सन्धि विग्रहः माम् उपेत्य पुनः-जन्म दुःख-आलयम् अशाश्वतम्। न आप्नुवन्ति मात्मानः संसिद्धिम् परमाम् गताः।।८-१५।। श्लोकार्थः परमाम्...

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Bhagavadgita 8-14, श्रीमद्भगवद्गीता ८-१४

श्लोकः अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः। तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः।।८-१४।। सन्धि विग्रहः अनन्य-चेताः सततम् यः माम् स्मरति नित्यशः। तस्य अहं सुलभः पार्थ नित्य-युक्तस्य योगिनः।।८-१४।। श्लोकार्थः हे पार्थ! यः...

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Bhagavadgita 8-12, 8-13, श्रीमद्भगवद्गीता ८-१२, ८-१३

श्लोकः सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च। मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम्।।८-१२।। ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्। यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्।।८-१३।। सन्धि विग्रहः सर्व-द्वाराणि संयम्य...

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