Month: December 2016

Bhagavadgita 9-11, श्रीमद्भगवद्गीता ९-११

श्लोकः अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्। परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम्।।९-११।। सन्धि विग्रहः अवजानन्ति माम् मूढाः मानुषीम् तनुम् आश्रितम्। परम् भावम् अजानन्तः मम भूत-महेश्वरम्।।९-११।। श्लोकार्थः भूत-महेश्वरम् मम परम्...

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Bhagavadgita 9-10, श्रीमद्भगवद्गीता ९-१०

श्लोकः मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम्। हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते।।९-१०।। सन्धि विग्रहः मया अध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचर-अचरम्। हेतुना अनेन कौन्तेय जगत् विपरिवर्तते।।९-१०।। श्लोकार्थः हे कौन्तेय! मया अध्यक्षेण...

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Bhagavadgita 9-9, श्रीमद्भगवद्गीता ९-९

श्लोकः न च मां तानि कर्माणि निबध्नान्ति धनञ्जय। उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु।।९-९।। सन्धि विग्रहः न च माम् तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय। उदासीनवत् आसिनम् असक्तम् तेषु कर्मसु।।९-९।। श्लोकार्थः हे धनञ्जय! तेषु कर्मसु असक्तम्...

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Bhagavadgita 9-8, श्रीमद्भगवद्गीता ९-८

श्लोकः प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य वसृजामि पुनः पुनः। भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात्।।९-८।। सन्धि विग्रहः प्रकृतिम् स्वाम् अवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः। भूत-ग्रामम् इमम् कृत्स्नम् अवशम् प्रकृतेः वशात्।।९-८।। श्लोकार्थः (अहम्)...

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Bhagavadgita 9-7, श्रीमद्भगवद्गीता ९-७

श्लोकः सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम्। कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम्।।९-७।। सन्धि विग्रहः सर्व-भूतानि कौन्तेय प्रकृतिम् यान्ति मामिकाम्। कल्प-क्षये पुनः तानि कल्प-आदौ विसृजामि अहम्।।९-७।। श्लोकार्थः हे...

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