हितम्

परो अपि हितवान् बन्धु: ,बन्धु: अपि अहित: पर: | अहित: देहज: व्याधि: , हितम् आरण्यम् औषधम् || The person with whom we have no relation, but who helps us in our difficult times is our Real relative/brother. In contrast the person who may be our relative/brother (With...

देवाः स्पृहयन्ति

अतिवादं न प्रवदेत्र वादयेद् यो नाहतः प्रतिहन्यात्र घातयेत्। हन्तुं च यो नेच्छति पातकं वै तस्मै देवाः स्पृहयन्त्यागताय॥ भावार्थ : जो न किसी को बुरा कहता है, न कहलवाता है; चोट खाकर भी न तो चोट करता है, न करवाता है, दोषियों को भी क्षमा कर देता है -देवता भी उसके स्वागत...

महात्मा

महात्मा विवेकः सह संपत्या विनयो विद्यया सह । प्रभुत्वं प्रश्रयोपेतं चिन्हमेतन्महात्मनाम् ।। संपत्तीसोबतच विवेक , विद्येसोबतच विनय आणि शक्तीसोबतच नम्रता ही महान व्यक्तीची लक्षणे असतात . सम्पन्नता के साथ विवेक , ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता , और शक्ति के साथ साधारणता यही...

साधुः

चन्दनम् शीतलम् लोके चंदनादपि चंद्रमा: | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: || Sandalwood is pleasant (cool), moon (or moon light) is more pleasant than sandal. (but) company of a good person (sādhu) is pleasant than both moon and...

परोपकरणं

परोपकरणं येषाम् , जागर्ति हृदये सताम्। नश्यन्ति विपद: तेषाम् ,सम्पद: स्यु: पदे पदे।। अर्थात- जिन सहृदय लोगों के हृदय में परोपकार करने की भावना सदैव जागृत रहती है ; उन्हें दुख और विपत्ति कभी नहीं सताती है ; बल्कि उन्हें पग-पग पर समृद्धि और खुशी प्राप्त होती है। The...

दीक्षा

दीक्षा सत्यं वद धर्मं चर स्वाध्यायान्मा प्रमदः । आचार्याय प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ।। वेदांचे शिक्षण पूर्ण झाल्यानंतर आश्रमातील शिष्यांना अनुशासनाची दीक्षा देताना आचार्य सांगतात : ” नेहमी सत्य बोला , धर्मसंमत आचरण करा . स्वाध्यायाबद्दल...