दूरस्थोऽपि न दूरस्थ:
यो यस्य हृदि संस्थितः ।
समीपस्थोऽपि दूरस्थ:
यो यस्य हृदि न स्थितः ।।

ज्या व्यक्तीला हृदयात स्थान असते ती व्यक्ती दूर असूनही जवळच असते आणि जिला हृदयात स्थान नसते ती व्यक्ती समोर असूनही बरीच दूर असते .

मन मे जो रहता हैं वह दूर रहते हुए भी दूर नही होता l और हृदय मे जो नही रहता वह समीप रहते हुए भी दूर होता हैं l

One , who dwells in your mind , is not far away even if he/she is not in the vicinity physically . One who does not find place in your heart , however , is far away even if he/she is physically nearby .