Inactive life is never good

Published on 28 December 2019 01:30 PM
योजनानां सहस्रं तु शनैर्गच्छेत् पिपीलिका ।

आगच्छन् वैनतेयोपि पदमेकं न गच्छति ॥

भावार्थ - जीवन में सदैव गतिमान् रहना चाहिये, गतिविहीन जीवन का परिणाम कभी मंगलकारी नही होता। जैसे नन्ही चींटी निरन्तर चलकर धीरे धीरे एक हज़ार योजन की यात्रा भी पूरी कर सकती है, परन्तु गरूड जगह से नही हिले तो वह एक पग भी आगे नही बढ सकता ।

Life should always be dynamic, the result of an inactive life is never good. Just as the little ant can continue to travel slowly and can travel a thousand kilometers slowly, but if the eagle does not move from the place, then one step can not increase further.