Subhashitam 5

नाप्राप्यमभिवांछन्ति नष्टं नेछन्ति शोचितुम् ।
आपत्स्वपि न मुह्यन्ति नराः पण्डितबुद्धयः ।।

वास्तव में वही व्यक्ति श्रेष्ठ तथा बुद्धिमान हैं, जो न मिलने वाली वस्तु की इच्छा नहीं करते, नष्ट हुई वस्तु का शोक नहीं करते तथा विपत्तियों से कभी घबराते नहीं है ।