बुद्धिः. Intellect (7) – बुद्धि (स्त्री), मनीषा (स्त्री), धिषणा (स्त्री), धी (स्त्री), प्रज्ञा (स्त्री), शेमुषी (स्त्री), मति (स्त्री)
1.5.1.1 – बुद्धिर्मनीषा धिषणा धीः प्रज्ञा शेमुषी मतिः

बुद्धिः. Intellect (7) – प्रेक्षा (स्त्री), उपलब्धि (स्त्री), चित् (स्त्री), संविद् (स्त्री), प्रतिपत् (स्त्री), ज्ञप्ति (स्त्री), चेतना (स्त्री)
1.5.1.2 – प्रेक्षोपलब्धिश्चित्संवित्प्रतिपत्ज्ञप्तिचेतना

धारणावत्बुद्धिः. (1) – मेधा (स्त्री)
मनोव्यापारकर्मः. (1) – सङ्कल्प (पुं)
1.5.2.1 – धीर्धारणावती मेधा सङ्कल्पः कर्म मानसम्

सावधानता. (3) – अवधान (नपुं), समाधान (नपुं), प्रणिधान (नपुं)
1.5.2.2 – अवधानं समाधानं प्रणिधानं तथैव च

मनसः सुखभोगे तत्परता. (2) – चित्ताभोग (पुं), मनस्कार (पुं)
विचारणम्. (3) – चर्चा (स्त्री), सङ्ख्या (स्त्री), विचारणा (स्त्री)
1.5.2.3 – चित्ताभोगो मनस्कारश्चर्चा संख्या विचारणा

वासना. (3) – विमर्श (पुं), भावना (स्त्री), वासना (स्त्री)
1.5.2.4 – विमर्शो भावना चैव वासना च निगद्यते

तर्कः. (3) – अध्याहार (पुं), तर्क (पुं), ऊह (पुं)
संशयज्ञानम्. (2) – विचिकित्सा (स्त्री), संशय (पुं)
1.5.3.1 – अध्याहारस्तर्क ऊहो विचिकित्सा तु संशयः

संशयज्ञानम्. (2) – सन्देह (पुं), द्वापर (पुं)
निश्चयः. (2) – निर्णय (पुं), निश्चय (पुं)
1.5.3.2 – सन्देहद्वापरौ चाथ समौ निर्णयनिश्चयौ

परलोको नास्तीति भावः. (2) – मिथ्यादृष्टि (स्त्री), नास्तिकता (स्त्री)
द्रोहचिन्तनम्. (2) – व्यापाद (पुं), द्रोहचिन्तन (नपुं)
1.5.4.1 – मिथ्यादृष्टिर्नास्तिकता व्यापादो द्रोहचिन्तनम्

सिद्धान्तः. (2) – सिद्धान्त (पुं), राद्धान्त (पुं)
अतस्मित्तज्ज्ञानम्. (3) – भ्रान्ति (स्त्री), मिथ्यामति (स्त्री), भ्रम (पुं)
1.5.4.2 – समौ सिद्धान्तराद्धान्तौ भ्रान्तिर्मिथ्यामतिर्भ्रमः

अङ्गीकारः. (7) – संविद् (स्त्री), आगू (स्त्री), +[आगुर् (स्त्री)], प्रतिज्ञान (नपुं), नियम (पुं), आश्रव (पुं), संश्रव (पुं)
1.5.5.1 – संविदागूः प्रतिज्ञानं नियमाश्रयसंश्रवाः

अङ्गीकारः. (5) – अङ्गीकार (पुं), +[स्वीकर (पुं)], अभ्युपगम (पुं), प्रतिश्रव (पुं), समाधि (पुं)
1.5.5.2 – अङ्गीकाराभ्युपगमप्रतिश्रवसमाधयः

मोक्षोपयोगिबुद्धिः. (1) – ज्ञान (नपुं)
शिल्पादिविषयकबुद्धिः. (1) – विज्ञान (नपुं)
1.5.6.1 – मोक्षे धीर्ज्ञानमन्यत्र विज्ञानं शिल्पशास्त्रयोः

मोक्षः. (6) – मुक्ति (स्त्री), कैवल्य (नपुं), निर्वाण (नपुं), श्रेयस् (नपुं), निःश्रेयस (नपुं), अमृत (नपुं)
1.5.6.2 – मुक्तिः कैवल्यनिर्वाणश्रेयोनिःश्रेयसामृतम्

मोक्षः. (2) – मोक्ष (पुं), अपवर्ग (पुं)
अज्ञानम्. (3) – अज्ञान (नपुं), अविद्या (स्त्री), अहम्मति (स्त्री)
1.5.7.1 – मोक्षोऽपवर्गोऽथाज्ञानमविद्याहंमतिः स्त्रियाम्

नेत्रेन्द्रियविषयः. (1) – रूप (नपुं)
श्रोत्रेन्द्रियविषयः. (1) – शब्द (पुं)
घ्राणेन्द्रियविषयः. (1) – गन्ध (पुं)
रसनेन्द्रियविषयः. (1) – रस (पुं)
त्वगिन्द्रियविषयः. (1) – स्पर्श (पुं)
विषयाः. (1) – विषय (पुं)
1.5.7.2 – रूपं शब्दो गन्धरसस्पर्शाश्च विषया अमी

विषयाः. (2) – गोचर (पुं), इन्द्रियार्थ (पुं)
चक्षुरादीन्द्रियम्. (3) – हृषीक (नपुं), विषयिन् (नपुं), इन्द्रिय (नपुं)
1.5.8.1 – गोचरा इन्द्रियार्थाश्च हृषीकं विषयीन्द्रियम्

पाय्वादीन्द्रियम्. (1) – कर्मेन्द्रिय (नपुं)
मनोनेत्रादीन्द्रियम्. (1) – धीन्द्रिय (नपुं)
1.5.8.2 – कर्मेन्द्रियं तु पाय्वादि मनोनेत्रादि धीन्द्रियम्

कषायरसः. (4) – तुवर (पुं), +[तूवर (पुं)], +[कुवर (पुं)], कषाय (पुं-नपुं)
मधुररसः. (1) – मधुर (पुं)
लवणरसः. (1) – लवण (पुं)
कटुरसः. (1) – कटु (पुं)
1.5.9.1 – तुवरस्तु कषायोऽस्त्री मधुरो लवणः कटुः

तिक्तरसः. (1) – तिक्त (पुं)
अम्लरसः. (2) – अम्ल (पुं), +[अम्ब्ल (पुं)]
1.5.9.2 – तिक्तोऽम्लश्च रसाः पुंसि तद्वत्सु षडमी त्रिषु

जनमनोहरगन्धः. (1) – परिमल (पुं)
1.5.10.1 – विमर्दोत्थे परिमलो गन्धे जनमनोहरे

सुगन्धः. (2) – आमोद (पुं), अतिनिर्हारिन् (पुं)
1.5.10.2 – आमोदः सोऽतिनिर्हारी वाच्यलिङ्गत्वमागुणात्

दूरगामिगन्धः. (2) – समाकर्षिन् (पुं), निर्हारिन् (पुं)
इष्टगन्धः. (2) – सुरभि (पुं), घ्राणतर्पण (पुं)
1.5.11.1 – समाकर्षी तु निर्हारी सुरभिर्घ्राणतर्पणः

इष्टगन्धः. (2) – इष्टगन्ध (पुं), सुगन्धि (पुं)
मुखवसनताम्बूलादिः. (3) – आमोदिन् (पुं), मुखवासन (पुं), +[अगुरुवासन (पुं)]
1.5.11.2 – इष्टगन्धः सुगन्धिः स्यादामोदी मुखवासनः

दुर्गन्धः. (2) – पूतिगन्धि (पुं), दुर्गन्ध (पुं)
अपक्वमांसादिगन्धः. (2) – विस्र (नपुं), आमगन्धि (नपुं)
1.5.12.1 – पूतिगन्धिस्तु दुर्गन्धो विस्रं स्यादामगन्धि यत्

शुक्लवर्णः. (7) – शुक्ल (पुं), शुभ्र (पुं), शुचि (पुं), श्वेत (पुं), विशद (पुं), श्येत (पुं), पाण्डर (पुं)
1.5.12.2 – शुक्लशुभ्रशुचिश्वेतविशदश्येतपाण्डरः

शुक्लवर्णः. (7) – अवदात (पुं), सित (पुं), गौर (पुं), अवलक्ष (पुं), +[वलक्ष (पुं)], धवल (पुं), अर्जुन (पुं)
1.5.13.1 – अवदातः सितो गौरो वलक्षो धवलोऽर्जुनः

पीतसंवलितशुक्लः. (3) – हरिण (पुं), पाण्डुर (पुं), पाण्डु (पुं)
ईषद्धवलवर्णः. (2) – ईषत्पाण्डु (पुं), धूसर (पुं)
1.5.13.2 – हरिणः पाण्डुरः पाण्डुरीषत्पाण्डुस्तु धूसरः

कृष्णवर्णः. (7) – कृष्ण (पुं), नील (पुं), असित (पुं), श्याम (पुं), काल (पुं), श्यामल (पुं), मेचक (पुं)
1.5.14.1 – कृष्णे नीलासितश्यामकालश्यामलमेचकः

पीतवर्णः. (3) – पीत (पुं), गौर (पुं), हरिद्राभ (पुं)
हरितवर्णः. (4) – पालाश (पुं), +[पलाश (पुं)], हरित (पुं), हरित् (पुं)
1.5.14.2 – पीतो गौरो हरिद्राभः पलाशो हरितो हरित्

रक्तवर्णः. (3) – लोहित (पुं), रोहित (पुं), रक्त (पुं)
अधिकरक्तवर्णः. (2) – शोण (पुं), कोकनदच्छवि (पुं)
1.5.15.1 – लोहितो रोहितो रक्तः शोणः कोकनदच्छविः

ईषद्रक्तवर्णः. (2) – अव्यक्तराग (पुं), अरुण (पुं)
श्वेतरक्तवर्णः. (2) – श्वेतरक्त (पुं), पाटल (पुं)
1.5.15.2 – अव्यक्तरागस्त्वरुणः श्वेतरक्तस्तु पाटलः

कृष्णपीतवर्णः. (2) – श्याव (पुं), कपिश (पुं)
कृष्णलोहितवर्णः. (3) – धूम्र (पुं), धूमल (पुं), कृष्णलोहित (पुं)
1.5.16.1 – श्यावः स्यात्कपिशो धूम्रधूमलौ कृष्णलोहिते

कपिलवर्णः. (6) – कडार (पुं), कपिल (पुं), पिङ्ग (पुं), पिशङ्ग (पुं), कद्रु (पुं), पिङ्गल (पुं)
1.5.16.2 – कडारः कपिलः पिङ्गपिशङ्गौ कद्रुपिङ्गलौ

नानावर्णाः. (6) – चित्र (नपुं), किर्मीर (पुं), +[कर्मीर (पुं)], कल्माष (पुं), शबल (पुं), कर्बुर (पुं)
1.5.17.1 – चित्रं किर्मीरकल्माषशबलैताश्च कर्बुरे

1.5.17.2 – गुणे शुक्लादयः पुंसि गुणिलिङ्गास्तु तद्वति

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